पठन-पाठन : यूपी में बदलेगा माध्यमिक विद्यालयों का पाठ्यक्रम, डिजिटल और प्रैक्टिकल पर जोर

राष्ट्रवाद और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दे होंगे शामिल कम होगा पाठ्यक्रम, कक्षा नौ से ही विषय चयन की सुविधा सत्र 2022-23 से सभी विषयों में लागू करने की तैयारी

पठन-पाठन : यूपी में बदलेगा माध्यमिक विद्यालयों का पाठ्यक्रम, डिजिटल और प्रैक्टिकल पर जोर

विस्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के माध्यमिक विद्यालयों का अस्तित्व बचाने व गरिमा लौटाने के आह्वान के बीच इन विद्यालयों के पाठ्यक्रम में व्यापक बदलाव का खाका तैयार कर लिया गया है। पाठ्यक्रम में किताबी ज्ञान को कम कर डिजिटल और प्रैक्टिकल को बराबर अनुपात में शमिल किया जाएगा। राष्ट्रवाद और सामाजिक सरोकारों के साथ देश व समाज को प्रभावित करने वाली समसामयिक घटनाओं को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। माध्यमिक विद्यालयों के पाठ्यक्रम में यह व्यापक बदलाव शैक्षिक सत्र 2022-23 से किया जाएगा।


माध्यमिक विद्यालयों में 32 सप्ताह की शिक्षण योजना को तीन भागों में बांटा जाएगा। पहले भाग में कक्षाओं में पठन-पाठन कराया जाएगा। दूसरे भाग में डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से विषयों का अध्ययन कराया जाएगा। तीसरे चरण में संबंधित विषय के प्रोजेक्ट बनवाए जाएंगे ताकि विद्यार्थी किताबी ज्ञान के साथ प्रैक्टिकल में भी दक्ष हो। सत्र 2022-23 से इसे सभी विषयों में लागू किया जाएगा।


पाठ्यक्रम में मूल्य परक शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण, राष्ट्रभक्ति और समाजसेवा से जुड़े कार्यों को शामिल किया जाएगा। समसामयिक घटनाओं के साथ आर्टिफिशिएल इंटेलिजेंस, जेंडर सेंसेटिविटी (लैंगिक संवेदनशीलता) और आपदा प्रबंधन विषय को भी शामिल किया जाएगा।

विकसित करेंगे प्रयोग आधारित सीखने की क्षमता
शैक्षिक सत्र 2021-22 से कक्षा 9 में विज्ञान विषय और 2022-23 से सभी विषयों में प्रयोग आधारित सीखने की क्षमता को विकसित किया जाएगा।

ग्रामीण स्कूलों में कृषि विज्ञान पढ़ाया जाएगा
ग्रामीण क्षेत्रों और अर्धनगरीय स्कूलों में कृषि विज्ञान विषय को पढ़ाने पर बल दिया जाएगा ताकि बच्चे स्कूली शिक्षा से ही कृषि के बारे में अत्याधुनिक जानकारी प्राप्त कर सकें।

सभी विषयों में लागू होगा नवाचार
माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में शैक्षिक सत्र 2021-22 से विज्ञान व गणित में नवाचार के विधिवत अध्ययन को लागू किया जाएगा। सत्र 2022-23 इसे सभी विषयों में लागू किया जाएगा।

साहित्यिक संस्कृत का अध्ययन
माध्यमिक विद्यालयों में संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए सामान्य संस्कृत के साथ साहित्यिक संस्कृत भी पढ़ाई जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों का स्कूली शिक्षा से ही संस्कृत में दक्ष बनाना है।

हर स्कूल में अंग्रेजी माध्यम का एक-एक सेक्शन
माध्यमिक शिक्षा विभाग के राजकीय विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक में अंग्रेजी माध्यम का एक-एक सेक्शन चरणबद्ध तरीके से स्थापित किया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों को भी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

दूसरे प्रदेशों की भाषाएं भी पढ़ाई जाएगी
नए पाठ्यक्रम में दूसरे प्रदेशों की भारतीय भाषाएं पढ़ाने की भी व्यवस्था की जाएगी। विद्यार्थी अपनी पसंद से उस भाषा का अध्ययन कर सकेंगे। मंडल मुख्यालय के एक राजकीय विद्यालय में प्राचीन शास्त्रीय भाषाओं से संबंधित साहित्य और ऑनलाइन मॉड्यूल विकसित किया जाएगा।

योगी ने कहा- माध्यमिक विद्यालयों का अस्तिव बचाने के लिए प्रयास करें शिक्षक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को कहा कि माध्यमिक विद्यालयों के अस्तित्व को बचाने और उनकी खोई गरिमा वापस लाने के लिए शिक्षकों को आगे आना होगा। माध्यमिक विद्यालयों के लिए लोक सेवा आयोग से चयनित 2846 सहायक अध्यापकों और प्रवक्ताओं को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन, प्रशासन और राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे लोग किसी कॉन्वेंट स्कूल से पढ़कर नहीं आए।

ये लोग राजकीय इंटर कॉलेजों में ही पढ़े लिखे हैं। मौजूदा समय में इन राजकीय विद्यालयों के समक्ष अस्तित्व बचाने की चुनौती है। उन्होंने कहा कि शिक्षक का सतत जिज्ञासु बने रहना आवश्यक है। विद्यार्थियों का भविष्य निर्माण करने के लिए शिक्षकों को भी विभिन्न व्यावसायिक कोर्स व शासन की योजनाओं की जानकारी होनी चाहिए। ब्यूरो